हाल ही में नागर विमानन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने देश के विमान क्षेत्र को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा की भारत तेजी से बढ़ते विमान बाजारों में से एक है, लेकिन नए विमानों की खरीद और आपूर्ति को लेकर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यह बयान उन्होंने गुजरात के भावनगर हवाई अड्डा पर नई उड़ानों को हरी झंडी दिखाने के दौरान दिया।
1700 विमानों का ऑर्डर, लेकिन डिलीवरी में देरी
नागर विमानन मंत्री ने बताया की भारतीय एयरलाइंस कंपनियों ने करीब 1700 नए विमानों का ऑर्डर दिया हुआ है। यह आंकड़ा भारत में बढ़ती हवाई यात्रा की मांग को दर्शाता है। हालांकि, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आ रही बाधाओं के कारण इन विमानों की डिलीवरी में काफी देरी हो रही है।
उन्होंने कहा की इन विमानों की पूरी डिलीवरी में 15 साल तक का समय लग सकता है। इसका सीधा असर एयरलाइंस कंपनियों के विस्तार और यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करने पर पड़ सकता है। कोविड-19 महामारी के बाद विमान उद्योग तेजी से उभरा है, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई में आई रुकावटें अभी भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है।
घरेलू विमान निर्माण पर सरकार का फोकस
इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार अब घरेलू विमान निर्माण को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। मंत्री ने कहा की भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह जरूरी है की हम अपने देश में ही विमानों का निर्माण करें।
इस दिशा में सरकार वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी कर रही है। उदाहरण के तौर पर ब्राजील की प्रमुख विमान निर्माता कंपनी एम्ब्रेयर के साथ संयुक्त उद्यम की दिशा में काम चल रहा है। इससे न केवल तकनीकी सहयोग मिलेगा बल्कि भारत में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
HAL के साथ मिलकर नए विमानों का निर्माण
सरकार ने घरेलू स्तर पर विमान निर्माण के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ भी सहयोग बढ़ाया है। मंत्री ने जानकारी दी की HAL के साथ मिलकर सुखोई सुपरजेट 100 जैसे विमानों के निर्माण पर काम किया जा रहा है।
यह कदम भारत को वैश्विक विमान निर्माण बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी बनाने की दिशा में अहम साबित हो सकता है। इससे देश में आधुनिक तकनीक का विकास होगा और विदेशी निर्भरता भी कम होगी।

भविष्य में 30,000 पायलटों की जरूरत
विमानन क्षेत्र के विस्तार के साथ-साथ मानव संसाधन की जरूरत भी तेजी से बढ़ रही है। मंत्री ने कहा की आने वाले समय में भारत को लगभग 30,000 नए पायलटों की आवश्यकता पड़ सकती है।
यह आंकड़ा दर्शाता है की देश में हवाई यात्रा का दायरा लगातार बढ़ रहा है। इसके लिए न केवल पायलटों बल्कि इंजीनियरों, तकनीशियनों और ग्राउंड स्टाफ की भी बड़ी संख्या में जरूरत होगी। सरकार इस दिशा में प्रशिक्षण और स्किल डेवलपमेंट पर भी ध्यान दे रही है।
भारत का विमानन क्षेत्र इस समय एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। एक तरफ जहां भारी संख्या में नए विमानों के ऑर्डर दिए जा रहे है, वहीं दूसरी तरफ सप्लाई चेन की समस्याएं विकास की गति को प्रभावित कर रही है।https://avmtimes.in/delhi-police-dp-active-fitness-center-state-of-the-art-gym-built-on-the-11th-floor-special-focus-on-fitness-and-mental-health/
हालांकि, सरकार द्वारा घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने, वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी और मानव संसाधन विकास पर ध्यान देने से आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र और मजबूत हो सकता है। अगर ये योजनाएं सही तरीके से लागू होती है, तो भारत न केवल अपने घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक विमानन उद्योग में भी अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।https://www.youtube.com/@avmtimes





