Bhojshala Dhar LIVE: 721 साल बाद शुक्रवार को हुई महाआरती, भक्तों की उमड़ी भीड़

मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला एक बार फिर देशभर में चर्चा का केंद्र बन गई है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद शुक्रवार को भोजशाला में ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसे कई लोग “721 साल बाद का ऐतिहासिक क्षण” बता रहे हैं। सुबह से ही पूरे परिसर में मां वाग्देवी (सरस्वती) के जयकारे गूंजते रहे, श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और अखंड पूजा के साथ भव्य महाआरती का आयोजन किया गया।

हाई कोर्ट के फैसले के बाद बदला माहौल

हाल ही में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने अपने फैसले में भोजशाला परिसर को देवी वाग्देवी यानी मां सरस्वती का मंदिर माना। कोर्ट ने 2003 के उस एएसआई आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसके तहत हिंदुओं को मंगलवार और मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी जाती थी।

कोर्ट के इस फैसले के बाद हिंदू संगठनों और श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला। फैसले के बाद लगातार भोजशाला परिसर में पूजा-पाठ, वैदिक अनुष्ठान और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

721 साल बाद ‘पहला शुक्रवार’ बताया जा रहा

भोज उत्सव समिति और कई हिंदू संगठनों का दावा है कि करीब 721 साल बाद भोजशाला में शुक्रवार के दिन अखंड पूजा और महाआरती आयोजित की गई। इसी वजह से शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक बताया जा रहा है। सुबह से श्रद्धालु हाथों में भगवा ध्वज लेकर परिसर पहुंचे और “जय मां वाग्देवी” के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।

मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजा की गई। कई श्रद्धालु दूर-दराज के इलाकों से दर्शन के लिए पहुंचे। सोशल मीडिया पर भी भोजशाला से जुड़े वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं।

भारी सुरक्षा व्यवस्था, ड्रोन और CCTV से निगरानी

संवेदनशील स्थिति को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर नजर आया। धार शहर को सुरक्षा छावनी में तब्दील कर दिया गया। करीब 1500 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई, जबकि ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से पूरे इलाके की निगरानी की गई।

धार पुलिस और जिला प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। अधिकारियों ने साफ कहा कि कोर्ट के आदेशों का पूरी तरह पालन कराया जाएगा और किसी भी प्रकार की अफवाह या भड़काऊ पोस्ट पर सख्त कार्रवाई होगी।

क्या है भोजशाला विवाद?

भोजशाला का इतिहास काफी पुराना और विवादों से जुड़ा रहा है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर और संस्कृत शिक्षा का केंद्र मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है। वर्षों से यह मामला अदालतों में चल रहा था।

बताया जाता है कि राजा भोज के समय यह विद्या और संस्कृति का प्रमुख केंद्र था। यहां मां वाग्देवी की पूजा की जाती थी। बाद में यह स्थल विवाद का विषय बन गया और पूजा तथा नमाज के लिए अलग-अलग दिन तय किए गए थे। लेकिन अब हाई कोर्ट के फैसले ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।

श्रद्धालुओं में उत्साह, पूरे शहर में जश्न जैसा माहौल

शुक्रवार को भोजशाला परिसर के आसपास मेले जैसा माहौल देखने को मिला। भक्त ढोल-नगाड़ों के साथ पहुंचे और कई जगह भजन-कीर्तन का आयोजन भी हुआ। महिलाओं और युवाओं की बड़ी संख्या ने पूजा में हिस्सा लिया। मंदिर परिसर को फूलों और रोशनी से सजाया गया था।

महाआरती के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं का कहना था कि यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि संस्कृति और आस्था की जीत का प्रतीक है।

मुस्लिम पक्ष पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

इधर, मुस्लिम पक्ष ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल कर दी गई है। आने वाले दिनों में इस मामले पर देशभर की नजर बनी रह सकती है।

इसके अलावा कुछ नई याचिकाएं भी दाखिल की गई हैं, जिनमें परिसर से कथित अवैध प्रतीकों को हटाने और आगे खुदाई कराने जैसी मांगें शामिल हैं।

निष्कर्ष

धार की भोजशाला में हुआ यह शुक्रवार केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और राजनीति से जुड़ा बड़ा घटनाक्रम बन चुका है। हाई कोर्ट के फैसले के बाद बदले हालातों ने पूरे देश का ध्यान इस ओर खींचा है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और प्रशासन की आगे की रणनीति पर टिकी हुई है।

भोजशाला में गूंजते “जय मां वाग्देवी” के नारों ने इस ऐतिहासिक स्थल को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का केंद्र बना दिया है।