हेयर ट्रांसप्लांट और एस्थेटिक प्रोसीजर पर IADVL और APSI की चेतावनी, मरीजों की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता
• एसोसिएशन ने हेयर ट्रांसप्लांट और कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट के लिए मज़बूत रेगुलेशन और खास ट्रेनिंग की मांग की।
• ऑनलाइन ‘डर्मेटोलॉजिस्ट’ से सावधान रहें: मेडिकल बॉडीज ने फर्जी और गुमराह करने वाली लिस्टिंग पर जताई चिंता
10 मार्च, 2026| नई दिल्ली: बड़ी मेडिकल बॉडीज – इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट, वेनेरोलॉजिस्ट एंड लेप्रोलॉजिस्ट (IADVL) और एसोसिएशन ऑफ प्लास्टिक सर्जन्स ऑफ इंडिया (APSI) – ने आज दिल्ली प्रेस क्लब में आयोजित एक जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एस्थेटिक और हेयर रेस्टोरेशन प्रोसीजर में मरीज़ों की सुरक्षा और ट्रेनिंग स्टैंडर्ड्स को लेकर चिंता जताई।
एसोसिएशन्स ने कहा कि डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (DCI) द्वारा डेंटिस्ट्स एक्ट, 1948 के प्रावधानों के तहत MDS डेंटल सर्जनों को कुछ एस्थेटिक प्रोसीजर और हेयर ट्रांसप्लांटेशन करने की अनुमति दिए जाने के बाद यह मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो गया है। मेडिकल बॉडीज के मुताबिक, ये प्रोसीजर पारंपरिक रूप से नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत प्रशिक्षित डर्मेटोलॉजिस्ट और प्लास्टिक सर्जन जैसे स्पेशलिस्ट द्वारा किए जाते रहे हैं।
जैसा कि IADVL के प्रेसिडेंट डॉ. विनय सिंह ने बताया, हेयर ट्रांसप्लांट जैसे प्रोसीजर करने के लिए एस्थेटिक प्रोसीजर और डर्मेटोलॉजी में अतिरिक्त ट्रेनिंग की आवश्यकता होती है। MBBS डिग्री के अलावा, डर्मेटोलॉजिस्ट ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत मान्यता प्राप्त मेडिकल स्कूलों में डर्मेटोलॉजी में पोस्टग्रेजुएट स्तर पर तीन साल की रेजिडेंसी करनी होती है। इस ट्रेनिंग में त्वचा की विभिन्न बीमारियों, बालों की समस्याओं और डर्मेटोलॉजी से जुड़े एडवांस्ड प्रोसीजर का अध्ययन शामिल होता है।
डॉ. रजत गुप्ता, प्लास्टिक सर्जन मरीज़ों को सलाह दी गई है कि किसी भी स्किन, हेयर या कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट से पहले डॉक्टर की क्वालिफिकेशन और स्टेट मेडिकल काउंसिल में उनका रजिस्ट्रेशन अवश्य वेरिफाई करें। डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन नंबर प्रिस्क्रिप्शन पर स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए।
डॉ. आदित्य अग्रवाल, सीनियर कंसल्टेंट, प्लास्टिक सर्जरी, Medanta के अनुसार, ऐसे सर्जिकल प्रोसीजर के लिए स्किन की बायोलॉजी, बालों के डिसऑर्डर, इन्फेक्शन मैनेजमेंट और संभावित कॉम्प्लीकेशंस को संभालने की गहरी समझ होना जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि हेयर ट्रांसप्लांट एक मॉडर्न मेडिकल प्रोसीजर है और इसे केवल रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर्स (RMPs) द्वारा ही किया जाना चाहिए, जो इस क्षेत्र में विशेषज्ञता रखते हों।
इस दौरान हेल्थ एक्सपर्ट्स ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ी है, जिनमें बिना पर्याप्त योग्यता वाले लोगों पर एस्थेटिक मेडिकल प्रोसीजर करने के आरोप लगे हैं। कानपुर हेयर ट्रांसप्लांट केस इसका एक बड़ा उदाहरण है, जिसमें हेयर ट्रांसप्लांट के बाद दो इंजीनियरों की मौत हो गई थी। आरोप है कि यह प्रोसीजर एक डेंटल सर्जन द्वारा किया गया था। देश के कई हिस्सों में बिना योग्य मेडिकल प्रैक्टिशनर्स द्वारा एस्थेटिक प्रोसीजर करने के अन्य मामले भी सामने आए हैं, जिनमें गंभीर संक्रमण, आंखों की रोशनी जाना और अन्य जटिलताएं शामिल हैं।
डॉ. शीतल पुजारी ऑनरेरी नेशनल सेक्रेटरी जनरल IADVL ने चेतावनी दी कि स्किन की बीमारियों, बालों के डिसऑर्डर और सर्जिकल कॉम्प्लीकेशंस के मैनेजमेंट में पर्याप्त मेडिकल ट्रेनिंग के बिना प्रोफेशनल्स को ऐसे प्रोसीजर करने की अनुमति देने से ट्रेनिंग के स्टैंडर्ड कम हो सकते हैं और मरीजों के लिए जोखिम बढ़ सकता है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े युवा डेमोग्राफिक्स में से एक है और हाल के वर्षों में स्किन, बालों और अन्य एस्थेटिक प्रोसीजर जैसे बोटॉक्स, हेयर ट्रांसप्लांट और थ्रेड लिफ्ट की मांग तेजी से बढ़ी है। इसी वजह से भारत के युवा एस्थेटिक और डर्मेटोलॉजिकल मार्केटिंग के टारगेट कंज्यूमर बन गए हैं।
हालांकि, स्किन और बालों से जुड़ी समस्याओं को लेकर सोशल मीडिया का अक्सर गलत इस्तेमाल होता है और लोग केमिस्ट या अन्य गैर-चिकित्सकीय प्रशिक्षित व्यक्तियों की सलाह पर दवाओं का इस्तेमाल करने लगते हैं। विशेषज्ञों ने फ्रॉड मार्केटिंग लिस्टिंग को लेकर भी चेतावनी दी। कई वेबसाइटें पेड ऐड प्लेसमेंट के जरिए “डर्मेटोलॉजिस्ट” के रूप में ऐसे लोगों को प्रमोट करती हैं, जिनके पास प्रैक्टिस के लिए बहुत कम या कोई सत्यापित मेडिकल क्वालिफिकेशन नहीं होती। यह स्थिति लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
डॉ. दीपिका पंडी- डर्मोटॉलिजिस्ट ने कहा कि मेडिकल प्रैक्टिस के विज्ञापन और मार्केटिंग को नियंत्रित करने के लिए बेहतर औपचारिक और कानूनी नियंत्रण प्रणाली की आवश्यकता है।
IADVL की तमिलनाडु ब्रांच (रिट पिटीशन नंबर 36164 और 12044 ऑफ 2024) ने डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया की 06 दिसंबर 2022 की गाइडलाइंस को चुनौती देते हुए मद्रास के माननीय हाई कोर्ट में कानूनी कार्रवाई शुरू की है। इन गाइडलाइंस में ओरल और मैक्सिलोफेशियल सर्जनों को कुछ एस्थेटिक और हेयर ट्रांसप्लांट प्रोसीजर करने की अनुमति दी गई है।
21 जनवरी 2026 को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया और नेशनल मेडिकल कमीशन के बीच रेगुलेटरी टकराव पर ध्यान दिया और केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को मामले की जांच कर मरीज़ों की सुरक्षा के हित में स्पष्ट रेगुलेटरी दिशा-निर्देश सुनिश्चित करने के लिए अपना जवाब देने का निर्देश दिया।
एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि पूरी गाइडलाइंस जारी की जाएं और मौजूदा नियमों को सख्ती से लागू किया जाए, ताकि झोलाछाप डॉक्टरों पर रोक लगाई जा सके और लोगों की सेहत की रक्षा की जा सके।
लोगों को यह भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है कि वे बिना लाइसेंस वाले डॉक्टरों के भ्रामक विज्ञापनों और ट्रीटमेंट से बचें।
IADVL और APSI के बारे में
इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट, वेनेरोलॉजिस्ट एंड लेप्रोलॉजिस्ट (IADVL) लगभग पचास साल पुरानी एसोसिएशन है, जो सोसाइटीज एक्ट के तहत वाराणसी में रजिस्टर्ड है और देशभर में इसके 17,000 से अधिक सदस्य हैं। यह संस्था त्वचा रोग, यौन रोग और कुष्ठ रोग से जुड़े रिसर्च, ट्रेनिंग और जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा देती है।https://avmtimes.in/malawi-food-crisis-india-sent-1000-metric-tons-of-rice-to-help-malawi-struggling-with-el-nino-and-drought/
वहीं APSI (Association of Plastic Surgeons of India) प्लास्टिक सर्जरी के क्षेत्र से जुड़े डॉक्टरों की राष्ट्रीय संस्था है, जो प्लास्टिक और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी से जुड़े मानकों, शिक्षा, रिसर्च और मेडिकल कॉन्फ्रेंस को प्रोत्साहित करती है।https://www.youtube.com/@avmtimes





