NDMC ने 10,000 किलो जैविक खाद बनाई, पार्कों में 100% कम्पोस्ट का लक्ष्य

नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने सतत कचरा प्रबंधन और हरित नई दिल्ली की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। परिषद ने एक विशेष कार्यक्रम के दौरान कर्मचारियों और बागवानी विभाग को गीले एवं बागवानी कचरे से तैयार जैविक कम्पोस्ट वितरित की। इस दौरान बागवानी विभाग के लिए जैविक खाद से भरे तीन ट्रकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

NDMC के चेयरमैन मनोज कुमार द्विवेदी ने कहा कि परिषद अपने पार्कों और बगीचों में जल्द से जल्द 100 प्रतिशत जैविक कम्पोस्ट के इस्तेमाल का लक्ष्य हासिल करने के लिए मिशन मोड में काम करेगी।

एक साल में तैयार हुई 10,000 किलो जैविक खाद

NDMC के अनुसार, पिछले एक वर्ष में चाणक्यपुरी के मधु लिमये मार्ग स्थित ऑर्गेनिक खाद सुविधा केंद्र में करीब 10,000 किलोग्राम जैविक खाद तैयार की गई है। यह खाद NDMC क्षेत्र से निकलने वाले गीले कचरे और बागवानी/हरे कचरे से तैयार की जाती है।

परिषद का कहना है कि स्थानीय स्तर पर जैविक कचरे को प्रोसेस करने से इसे दूर स्थित लैंडफिल या प्रोसेसिंग साइटों तक ले जाने की आवश्यकता कम होती है। इससे परिवहन की जरूरत और उससे होने वाले प्रदूषण को भी कम करने में मदद मिलती है।

RWAs तक पहुंचाई जाएगी पहल

कार्यक्रम में चेयरमैन मनोज कुमार द्विवेदी ने कहा कि वर्मीकम्पोस्टिंग के जरिए तैयार जैविक खाद को अब कर्मचारियों के साथ-साथ रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWAs) तक पहुंचाने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

इसका उद्देश्य लोगों को घरों के गमलों, नर्सरी और अन्य छोटे हरित क्षेत्रों में प्राकृतिक खाद के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करना है। NDMC का जोर रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और जैविक एवं टिकाऊ बागवानी को बढ़ावा देने पर है।

‘Waste to Wealth’ से ‘Waste to Greenery’ की ओर

NDMC चेयरमैन ने कहा कि जिस कचरे को पहले बेकार समझा जाता था, उसे अब उपयोगी संसाधन में बदला जा रहा है। परिषद का लक्ष्य ‘Waste to Wealth’ और ‘Waste to Greenery’ की अवधारणा को बढ़ावा देते हुए एक सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में आगे बढ़ना है।

इसके तहत गीले और हरे कचरे को स्थानीय स्तर पर प्रोसेस कर पोषक तत्वों से भरपूर कम्पोस्ट तैयार की जा रही है, जिसका इस्तेमाल पार्कों, बगीचों, रिहायशी कॉलोनियों और अन्य हरित क्षेत्रों में किया जा रहा है।

NDMC के पास 79 कम्पोस्टिंग सेंटर

NDMC ने जैविक कचरे के विकेंद्रीकृत प्रसंस्करण के लिए अपने क्षेत्र में 79 कम्पोस्टिंग सेंटर स्थापित किए हैं। इनमें बल्क वेस्ट जेनरेटर (BWGs) द्वारा संचालित सुविधाएं भी शामिल हैं।

इनमें:

  • 46 कम्पोस्ट पिट — करीब 15 टन प्रतिदिन क्षमता
  • 27 ऑर्गेनिक वेस्ट कन्वर्टर (OWCs) — करीब 10 टन प्रतिदिन क्षमता
  • 5 कम्युनिटी कम्पोस्टर — करीब 5 टन प्रतिदिन क्षमता
  • ओखला में 1 वेस्ट-टू-कम्पोस्ट सुविधा — करीब 60 टन प्रतिदिन क्षमता

इसके अलावा अलग-अलग स्थानों, विशेषकर रिहायशी इलाकों में करीब 110 एरोबिन लगाए गए हैं, जिनकी कुल क्षमता लगभग 45 मीट्रिक टन बताई गई है। इनके माध्यम से किचन वेस्ट, फल-सब्जियों के छिलकों और अन्य बायोडिग्रेडेबल कचरे को स्थानीय स्तर पर कम्पोस्ट में बदलने में मदद मिलती है।

रोजाना 80–100 टन बागवानी कचरे की प्रोसेसिंग

NDMC के अनुसार उसके क्षेत्र में प्रतिदिन लगभग 80–100 टन बगीचे और हरित क्षेत्रों से निकलने वाला कचरा उत्पन्न होता है। परिषद विकेंद्रीकृत कम्पोस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से इस कचरे को उसके उत्पादन स्थल के आसपास ही प्रोसेस करने पर जोर दे रही है।

मधु लिमये मार्ग, सांगली मेस, राजा बाजार, न्यू मोती बाग और भारती नगर सहित विभिन्न स्थानों तथा रिहायशी कॉलोनियों और पार्कों में कम्पोस्टिंग सुविधाएं संचालित की जा रही हैं।

नागरिकों से कचरा अलग करने की अपील

NDMC चेयरमैन ने नागरिकों से स्रोत पर ही कचरे का पृथक्करण (Source Segregation) करने की अपील की। उन्होंने कहा कि गीले कचरे, सूखे कचरे, सैनिटरी कचरे और घरेलू खतरनाक कचरे को अलग-अलग रखना जरूरी है।

NDMC का कहना है कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से गीले और बागवानी कचरे को खाद में बदलकर उसे दोबारा मिट्टी और हरियाली के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।https://youtube.com/shorts/XDDVQnB4VNs?si=rwLp0izYtU9mVMwn

परिषद के अनुसार, यह पहल स्वच्छ भारत मिशन, बेहतर ठोस कचरा प्रबंधन और स्वच्छ, हरित एवं टिकाऊ नई दिल्ली के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।https://avmtimes.in/%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%9a%e0%a4%ae%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%b0/